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तीज का त्यौहार – Teej ka tyohaar

teej in hindi

तीज (teej) का त्यौहार २०२० में कब है? तीज हरतालिका क्यों मनाई जाती है और इसमें क्या क्या खा सकते है – इस त्यौहार पे पूरी जानकारी

तीज हरतालिका २०२०

तीज कब है ( Teej in 2020)

तीज (Teej)  मानसून के वक़्त मनाया जाने वाला त्यौहार है. ये दांपत्य जीवन में सुख समृद्धि के लिए महिलाओ द्वारा मनाया जाता है.

इस साल तीज अगस्त २१ को है. 

तीज की पूरी जानकारी (Teej festival explained in Hindi)

teej kee tareek

भारत एक विशाल राष्ट्र है,जिसके पास विविधताओं का भंडार है. अपनी विशिष्ट संस्कृति में भारत के पास अनेकों त्योहार हैं,जो क्षेत्र दर क्षेत्र बदलते हैं,साथ में बदलता है त्योहारों का स्वरूप।

त्योहार कहने को तो धर्म से जुड़े होते हैं, लेकिन हम सब मिल कर मनाते हैं,जैसे ईद में हिन्दू भी मुस्लिम घरों में सेवई खाने जाते हैं, वहीं होली में मुस्लिम भी हिन्दू घरों में खुलकर जाते हैं।

मजेदार तो यह है कि एक जनवरी को न्यू ईयर विश करने वाले ज्यादा भारतीय होते हैं। दिवाली, होली तो बड़े त्योहार होते हैं,जिनका स्वरूप बड़ा और रंगीन है. 

लेकिन भारत के अन्य त्योहार ज्यादा विशिष्ट संदेश देते हैं,जैसे नाग पंचमी जैव विविधता संरक्षण,इत्यादि।

तीज (Teej) क्या है?

कैसे मनाया जाता है? कब मनाया जाता है? (Teej kaise manaya jaata hai)

निश्चित तौर पर भारत के गांवों से जुड़े लोग इसे जानते हैं.  लेकिन जानने का तरीका अलग अलग है।कोई इसे बरसात में मनाए किए जाने वाले व्रत के रूप में याद रखता है,तो कोई इसे पतियों के लिए किया जाने वाला व्रत।

आइए आप की जानकारी को भारत की संस्कृति के बारे में और पुख़्ता करते हैं. आज हम चर्चा करेंगे तीज की, इससे जुड़ी लोक मान्यताओं की,परम्पराओं की।और तीज से होने वाले शरीर पर प्रभाव की।

तीज भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। (Teej kab hai)

teej ka vrat

मान्यता है कि भगवान शिव,माता पार्वती को वर के रूप में प्राप्त हुए थे। इसी कारण इस दिन कुंवारी कन्याएं और विवाहित महिलाएं व्रत रखती हैं।

कन्याएं मनचाहे वर के लिए और महिलाएं पति के स्वास्थ्य,चैतन्य और लंबी उम्र के लिए।

तीज का व्रत (Teej fasting)

तीज एक निर्जल व्रत है, अर्थात् पानी की बूंद के बग़ैर व्रत रहना।यह पुरुषों के लिए सोचना मुश्किल है।
तीज की व्रत के पिछली रात को ही नींबू, केला जैसे फल लिए जाते हैं, ताकि ऊर्जा क्षमता बनी रहे।सुबह से दोपहर तक सब ऐसे बीत जाता है।

फिर दोपहर में नहाना और उसके बाद पूजा पाठ,हवन और हरितालिका व्रत कथा सुनाई जाती है।

शाम के समय कुछ मीठा बनाया जाता है,जो पार्वती जी को भोग लगाया जाता है, और सुबह उसी से व्रत खोला जाता है।

व्रत में विविध प्रसाद चढ़ाए जाते हैं,जिनमें सेब, केला, नारियल,मिठाई होते हैं।जबकि रात में मीठे में सिंघाड़ा की बर्फी,या दूध की कोई मिठाई चढ़ाई जाती है।

तीज व्रत का वैद्यानिक महत्व

Benefits of Teej vrat

वैसे तो आधुनिक युग में व्रत या फास्टिंग बहुत महत्वपूर्ण हो गयी है. पहले व्रत को मजाक में लेने वाले लोग भी आजकल अलग अलग वक़्त और दिन व्रत करने से नहीं चूकते। 

तीज व्रत दो प्रकार से फ़ायदा करता है. 

पहला व्रत की वजह से शरीर में ने स्फूर्ति आती है और साथ ही पाचन क्रिया को फिर से सही होने का मौका मिलता है. 

दूसरा की तीज के व्रत में तीन प्रकार की वस्तुए खाने की परम्परा है. उन वस्तुओ का शरीर पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है. नीचे दी गयी तीनो वस्तुओ को अगर आप देखेंगे तो पाएंगे की इनमे नुट्रिएंट्स भरपूर मात्रा में तो है ही साथ ही ये शरीर की दुसरे रूप से भी सहायता करता है. 

आज थोड़ी चर्चा करते हैं,सेब और केला के हमारे शरीर पर प्रभाव की

1. सेब (Benefits of apple)

सेबफल में एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होता है। इसमें पाए जाने वाले पॉलीफेनोल और फ्लेवोनोइड्स दिल के स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है।

इसके अलावा, यह आपके शरीर के लिए आवश्यक मिनेरल्स, और पोटेशियम तत्वों का बेहतरीन स्त्रोत है। दिन में एक बार सेबफल के ज्यूस को लेने से ह्रदय के लिए सुचारु रुप से काम करना आसान हो जाता है।

सेबफल में मौजूद अल्कालिनिटी लीवर को शरीर के शोधन में मदद करता है।

इसका कॉलेस्ट्रोल के स्तर को कम करने का अनूठा गुण होता है। आधुनिक लाइफस्टाइल में बढ़े हुए कॉलेस्ट्रोल की समस्या बड़े व्यापक पैमाने पर फैल चुकी है और यह ह्रदय संबंधी रोगों का मुख्य कारण है।

सेब में प्रचुर मात्रा में एंथोसियानिन और टैनिन होता है। इस फल में खूब विटामिंस, फाइबर और अन्‍य पोषक तत्‍व होते हैं जिनमें भरपूर औषधीय गुण पाए जाते हैं।

सेब खाने से कोलेस्‍ट्रोल कम होता है और दिल दुरुस्‍त रहता है। ये दांतों को भी मजबूती देता है। कैंसर से बचाने और डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए भी सेब का इस्‍तेमाल किया जाता है।

2.केला (Benefits of banana)

केले में भरपूर मात्रा में फाइबर मौजूद होते हैं जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं।अगर आप रोजाना केले का सेवन कर रहे हैं तो आपकी पाचन क्रिया अच्छी रहेगी।

हमारे शरीर को पर्याप्त मात्रा में विटामन बी6 की आवश्यकता होती है ताकि हिमोग्लोबिन और इंसुलिन का निर्माण हो सके। केले में ये पोषक तत्व होने से शरीर की इस आवश्यकता की पूर्ति हो जाती है।

यह हमारे लिए पोषण से भरपूर एक फल है जो शरीर को कई फायदे देता है। पोटेशियम, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और एनर्जी से भरपूर ये फल भी आपके सेहत के लिए बहुत अच्छा है.

केले में फाइबर होते हैं जो पेट को देर तक भरा होने का अहसास कराते हैं। इसके साथ ही फाइबर आपके पाचन तंत्र को भी मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

इससे आपके शरीर को एनर्जी ज्यादा मिलने लगती है और वह एक्टिव रहता है। यही वजह है कि केला खाने के बाद खूब एनर्जी महसूस होती है।

तो अगर आप जिम में खूब पसीना बहाना चाहते हैं और अपने कैलोरी बर्न करने के टाइगेट को बिना थके पूरा करना चाहते हैं।  तो जिम से 1 या आधा घंटे पहले एक केला जरूर खाएं।ऐसा करने से केले में मौजूद कार्बोहाइड्रेट्स आपको लंबे समय तक एनर्जी देते हैं।

3.सिंघाड़ा (Benefits of Singhada)

सिंघाड़ा पानी में पैदा होता है। इसलिए इसे पानी फल भी कहा जाता है। सिंघाड़ा खाने से कई तरह के फायदे होते हैं।

अक्टूबर से सिंघाड़े का फल मिलने लगता है। सर्दियों में यह फल हर जगह मिलता है। सिंघाड़े को कच्चा भी खाते हैं।

इसे उबाल कर नमक के साथ भी खाया जाता है। जब सिंघाड़े का सीजन नहीं होता, तब भी इसके आटे का इस्तेमाल हलवा वगैरह बनाने में किया जाता है।

सिंघाड़ा में विटामिन ए, सिट्रिक एसिड, फॉस्फोरस, विटामिन सी, मैंगनीज, थायमिन, कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, आयोडीन और मैग्नीशियम पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इन तत्वों के होने से सिंघाड़ा हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी माना गया है।

अगर रोज 25-50 ग्राम सिंघाड़ा खाया जाए तो इससे कई तरह के फायदे होते हैं।

ये रहे इन फलों के संक्षिप्त फायदे, इन पर और कभी विस्तृत रूप से चर्चा किया जाएगा।

सिंघाड़े में कार्बोहायड्रेट बहुत होता है इसलिए मधुमेह टाइप २ वालो को इसको सोच समझ कर खाना चाहिए। 

तीज व्रत का सन्देश (Teej message)

teej festival

ख़ैर यह व्रत एक संदेश है,जो महिला शक्ति और सामर्थ्य का अद्भुत उद्घोष और प्रदर्शन है।यह विशिष्ट शक्ति जो जनने की होती है,प्रकृति ने मात्र महिलाओं को सौंपकर उन्हें अद्भुत बनाया है।इस कठिन व्रत को करना कितना मुश्किल है,इसे आप ऐसे समझें की कार्य के मात्रा में कमी नहीं है,लेकिन पानी भी नहीं पीना है।

वैसे इसके थोड़े से फायदे हैं जो स्वास्थ्य को होते हैं, अव्वल टॉक्सिक मैटेरियल बाहर होते हैं जैसी कई बातें हैं, लेकिन वह इस तपस्या के सामने नगण्य है।

अगर अब भी आप इसकी गंभीरता को नहीं समझ पा रहे हैं तो एक दिन बिना जल के रह कर देख लीजिए।
नमन है महिला शक्ति को,माताओं को।

आप सभी को तीज के त्योहार की शुभकामनाएं,इस अपेक्षा के साथ कि आप अपनी मां,पत्नी,या हर उस स्त्री के प्रति आभार और सम्मान प्रकट करें, जो आपके लिए हमेशा कार्य करती हैं।

पढ़ते रहें सेहत समाचार,और हमें लिखें भी कि आप सेहत के विषय पर और जानना चाहते हैं।

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